शाम पर शेर
Shaam Shayari शाम होते ही खुली सड़कों की याद आती है सोचता रोज़ हूँ मैं घर से नहीं निकलूँगा शहरयार…
हिन्दी और उर्दू साहित्य का संगम
Shayari
‘साहित्य दुनिया’ के ज़रिए कोशिश ये है कि लोगों की रूचि साहित्य और भाषा में बढ़े। ये साहित्य और भाषा से जुड़ी बातों को बड़े-बड़े और गम्भीर वाक्यों से न समझाकर उसे सरल, बोलचाल की भाषा में आम जन तक पहुँचाने का प्रयास है।
Shaam Shayari शाम होते ही खुली सड़कों की याद आती है सोचता रोज़ हूँ मैं घर से नहीं निकलूँगा शहरयार…
Father’s Day Poetry In Hindi माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है आज अपने साथ अपना जनम…
Munir Niazi Shayari ~ 1. शहर की गलियों में गहरी तीरगी गिर्यां रही रात बादल इस तरह आए कि मैं…
Barsaat Shayari Baarish Shayari 1. घटा देख कर ख़ुश हुईं लड़कियाँ छतों पर खिले फूल बरसात के मुनीर नियाज़ी (Munir…
Sahir Ludhianvi Shayari 1. तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ 2. कोई तो…
Breakup shayari ~ वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो वही या’नी…
Kamar Best Shayari बुरा क्या है बाँधो अगर तेग़-ओ-ख़ंजर मगर पहले अपनी कमर देख लेना जलील मानिकपूरी برا کیا ہے…
Gar Baazi Ishq Ki Baazi hai ~ Faiz Ahmed Faiz कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा…
Bulati hai magar jaane ka naiN बुलाती है मगर जाने का नईं वो दुनिया है उधर जाने का नईं सितारे…
“मातृ दिवस” (Mothers Day) के मौक़े पर हम अपने पाठकों के लिए ज़हरा निगाह की नज़्म “डाकू” (Zehra Nigah Ki…