उर्दू शायरी और शब्द : ख़ुलासा, ख़िलाफ़त, बिलकुल और भूक…
Sahitya Duniya
Urdu ke words Khulasa: ख़ुलासा (خلاصہ): ख़ुलासा का जो अर्थ आजकल मीडिया में इस्तेमाल हो रहा है वो इसके सही अर्थ से बिलकुल जुदा है. ख़ुलासा का अर्थ होता है सारांश जबकि मीडिया में इसे इस तरह इस्तेमाल किया जाता है मानो इसका अर्थ राज़ खोलना हो. इस लफ़्ज़ का वज़़्न 122 होता है. (ख़ु-1, ला-2, सा-2)
अब्दुल हमीद अदम का शे’र देखिये-
“बस इस क़दर है ख़ुलासा मिरी कहानी का،
कि बन के टूट गया इक हबाब पानी का” Urdu ke words Khulasa
ख़िलाफ़त (خلافت): ख़िलाफ़त एक ऐसा शब्द है जिसे अक्सर करके लोग ग़लत अर्थ में इस्तेमाल करते हैं. असल में लफ़्ज़ ख़िलाफ़ का अर्थ होता है विरूद्ध, मुख़ालिफ़ या विरोधी इसलिए लोगों को लगता है कि ख़िलाफ़त का अर्थ हो जाएगा किसी का विरोध करना जबकि ये बिलकुल ग़लत है. ख़िलाफ़त का अर्थ होता है ख़लीफ़ा की सरकार का अधिकार क्षेत्र. ख़लीफ़ा पैग़म्बर मुहम्मद साहब के उत्तराधिकारी को कहा जाता है. ख़िलाफ़त का वज़्न 122 लिया जाता है. (ख़ि-1, ला-1,फ़त-2)
परवीन कुमार अश्क का शे’र देखिये-
“ज़ख़्म खाता हूँ शुक्र करता हूँ,
हाँ ख़िलाफ़त उसूल हूँ मैं तो”
बिलकुल (بالکل): बिलकुल का अर्थ होता है निश्चित, ज़रूर. जो लोग उर्दू लिखना-पढ़ना जानते हैं, उन्हें ये पता होगा कि बिलकुल असल में लिखा बा’लकुल है लेकिन इसका तलफ़्फु़ज़ बिलकुल होता है. बिलकुल का वज़्न उर्दू शा’इरी में 22 लिया जाता है (बिल-2, कुल-2)
आरिफ़ शफ़ीक़ का शे’र देखिये-
मुझको वैसा ख़ुदा मिला बिल्कुल,
मैंने ‘आरिफ़’ किया गुमाँ जैसा
भूक (بھوک): भूक का अर्थ होता है खाना खाने की इच्छा, किसी चीज़ की तीव्र अभिलाषा. ये एक एक ऐसा शब्द है जिसे अधिकतर लोग भूख बोलते हैं लेकिन सही लफ़्ज़ भूक है ना कि भूख. हालाँकि पिछले इतने सालों में लोगों ने भूख का इतना इस्तेमाल किया है कि भूख भी अब सही मान लिया जाता है. भूक का वज़्न 21 लिया जाता है. (भू 2, क-1)
अदम गोंडवी का शे’र देखिये-
“भूक के एहसास को शेर-ओ-सुख़न तक ले चलो,
या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले चलो”