ताबिश देहलवी की शायरी
अभी हैं क़ुर्ब के कुछ और मरहले बाक़ी कि तुझको पा के हमें फिर तिरी तमन्ना है _______ छोटी पड़ती...
अभी हैं क़ुर्ब के कुछ और मरहले बाक़ी कि तुझको पा के हमें फिर तिरी तमन्ना है _______ छोटी पड़ती...
उनका अंतिम धनुष (His Last Bow in Hindi) - आर्थर कॉनन डॉयल 2 अगस्त की रात के नौ बजे...
Bashir Badr Shayari यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है...
Amjad Islam Amjad Shayari चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन...
Anjum Rahbar Shayari आग बहते हुए पानी में लगाने आई तेरे ख़त आज मैं दरिया में बहाने आई फिर तिरी...
यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके-चुपके पढ़ा...
तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद तू है...
Ahmad Salman Shayari जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे जब अपनी अपनी...
ये ज़ाफ़रानी पुलोवर उसी का हिस्सा है, कोई जो दूसरा पहने तो दूसरा ही लगे बशीर बद्र —— उजाले अपनी...
"8 साल हो गए मेरी इस नौकरी को, 8 साल...क्या मिला? कुछ महीनों के ख़र्च के रुपए और कुछ उम्मीदें,...