दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ – शकील बदायूँनी
दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ इस कसरत-ए-ग़म पर भी मुझे…
वो हँसती है तो उसके हाथ रोते हैं – अब्बास ताबिश
किसी के ब’अद अपने हाथों की बद-सूरती में खो गई है वो मुझे कहती है ‘ताबिश’! तुमने देखा मेरे हाथों…
हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है – मोहसिन नक़वी
हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है तो देर तक मिरे घर का सुकूत बोलता है हम ऐसे ख़ाक-नशीं…
बहनें – असद ज़ैदी
कोयला हो चुकी हैं हम बहनों ने कहा रेत में धँसते हुए ढक दो अब हमें चाहे हम रुकती हैं…
हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है – मिर्ज़ा ग़ालिब
हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो’ले…
बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए – परवीन शाकिर
बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए मौसम के हाथ भीग के सफ़्फ़ाक हो गए बादल को क्या…
हम देखेंगे – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे वो दिन कि जिसका वादा है जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है जब…
रोटी और संसद – धूमिल
एक आदमी रोटी बेलता है एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है,…
भगवान के डाकिए – रामधारी सिंह दिनकर
पक्षी और बादल, ये भगवान के डाकिए हैं, जो एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं। हम तो समझ…
हताशा – विनोद कुमार शुक्ल
हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस…