उर्दू शायरी और शब्द: हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?

अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें "हालातों", "जज़्बातों" या...

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम – मोमिन ख़ाँ मोमिन

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम पर क्या करें कि हो गए नाचार जी से हम...

अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से – परवीन शाकिर

अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से ज़मीं की ख़ैर माँगें आसमाँ से अगर चाहें तो वो दीवार कर दें हमें...

दिल धड़कने का सबब याद आया – नासिर काज़मी

दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी अब याद आया आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्त तू...

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है – परवीन शाकिर की ग़ज़ल

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है मुझ पे एहसान हवा करती है चूम कर फूल को आहिस्ता से मो’जिज़ा बाद-ए-सबा...

तीसरी क़सम – फणीश्वरनाथ रेणु

Teesri Qasam Renu हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी।...

कोलुशा – मैक्सिम गोर्की

मैक्सिम गोर्की की कहानी - कोलुशा क़ब्रिस्तान का वह कोना, जहाँ भिखारी दफ़नाये जाते हैं। पत्तों से छितरे, बारिश से...