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ग़ालिब जितने बड़े शा’इर थे उतने ही बड़े फ़िलोसफ़र भी थे: ज़ीशान मीर
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दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ – शकील बदायूँनी

अरग़वान रब्बही

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ इस कसरत-ए-ग़म पर भी मुझे…

नज़्म शायरी

वो हँसती है तो उसके हाथ रोते हैं – अब्बास ताबिश

अरग़वान रब्बही

किसी के ब’अद अपने हाथों की बद-सूरती में खो गई है वो मुझे कहती है ‘ताबिश’! तुमने देखा मेरे हाथों…

ग़ज़ल शायरी

हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है – मोहसिन नक़वी

अरग़वान रब्बही

हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है तो देर तक मिरे घर का सुकूत बोलता है हम ऐसे ख़ाक-नशीं…

कविताएँ

बहनें – असद ज़ैदी

नेहा शर्मा

कोयला हो चुकी हैं हम बहनों ने कहा रेत में धँसते हुए ढक दो अब हमें चाहे हम रुकती हैं…

ग़ज़ल शायरी

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है – मिर्ज़ा ग़ालिब

अरग़वान रब्बही

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो’ले…

ग़ज़ल शायरी

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए – परवीन शाकिर

अरग़वान रब्बही

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए मौसम के हाथ भीग के सफ़्फ़ाक हो गए बादल को क्या…

नज़्म शायरी

हम देखेंगे – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अरग़वान रब्बही

हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे वो दिन कि जिसका वादा है जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है जब…

कविताएँ

रोटी और संसद – धूमिल

नेहा शर्मा

एक आदमी रोटी बेलता है एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है,…

कविताएँ

भगवान के डाकिए – रामधारी सिंह दिनकर

नेहा शर्मा

पक्षी और बादल, ये भगवान के डाकिए हैं, जो एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं। हम तो समझ…

कविताएँ

हताशा – विनोद कुमार शुक्ल

नेहा शर्मा

हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस…

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वर्कशॉप और इवेंट्स के दौरान…
जब साहित्य दुनिया पहुँचा बच्चों के पास..
अरग़वान रब्बही साहित्य दुनिया की वर्कशॉप के दौरान
जब साहित्य दुनिया पहुँचा बच्चों के पास..
विवा वौइस् अकादमी में साहित्य दुनिया की वर्कशॉप
नेहा शर्मा साहित्य दुनिया की वर्कशॉप के दौरान
विवा वौइस् अकादमी में साहित्य दुनिया की वर्कशॉप
वौइस् आर्टिस्ट और अभिनेता अमरिंदर सिंह सोढ़ी, विवा वौइस् अकादमी की संस्थापक वंदना सेन गुप्ता के साथ साहित्य दुनिया के संस्थापक नेहा शर्मा और अरग़वान रब्बही
मुंबई में साहित्य दुनिया की वर्कशॉप
जस्ट बुक्स अँधेरी में एक प्रोग्राम के बाद ली गयी तस्वीर
नेहा शर्मा साहित्य दुनिया की वर्कशॉप के दौरान
जब साहित्य दुनिया पहुँचा बच्चों के पास..
अरग़वान रब्बही साहित्य दुनिया की वर्कशॉप के दौरान
जब साहित्य दुनिया पहुँचा बच्चों के पास..
नेहा शर्मा के साथ वंदना सेन गुप्ता
साहित्य दुनिया टीम
नेहा शर्मा (Neha Sharma)
अरग़वान रब्बही (Arghwan Rabbhi)
साहित्य दुनिया के बारे में

साहित्य दुनिया नेहा शर्मा और अरग़वान रब्बही का साझा प्रयास है. इसके ज़रिए कोशिश ये है कि लोगों की रूचि साहित्य और भाषा में बढ़े। ये साहित्य और भाषा से जुड़ी बातों को बड़े-बड़े और गम्भीर वाक्यों से न समझाकर उसे सरल, बोलचाल की भाषा में आम जन तक पहुँचाने का प्रयास है।

शायद यही कारण है कि साहित्य दुनिया को कम समय में ही पाठकों का ढेर सारा प्यार मिला है और लगातार मिल रहा है. साहित्य दुनिया की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई लेकिन जल्द ही साहित्य दुनिया ने मुंबई में अपनी वर्कशॉप और परिचर्चा आदि भी शुरू की है। ये एक ऐसा सिलसिला है जो अभी भी जारी है और इसे आगे बढ़ाने के लिए हम प्रयासरत हैं।

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