दो शा’इर, दो नज़्में (3): फ़रहत एहसास और फ़हमीदा रियाज़
Farhat Ehsas Nazm फ़रहत एहसास की नज़्म: ख़ुद-आगही वो कैसी तारीक घड़ी थी, जब मुझको एहसास हुआ था मैं तन्हा…
मजाज़ की ग़ज़ल: “जिगर और दिल को बचाना भी है”
Jigar aur dil ko bachana जिगर और दिल को बचाना भी है, नज़र आप ही से मिलाना भी है मुहब्बत…
14 साल की उम्र से शुरू’अ हुआ ज़हरा निगाह की शा’इरी का सफ़र…
Zehra Nigah Shayari “हिकायत ए ग़म ए दुनिया तवील थी कह दी, हिकायत ए ग़म ए दिल मुख़्तसर है क्या…
मिर्ज़ा ग़ालिब की रुबाइयाँ…
मिर्ज़ा ग़ालिब (27 दिसंबर, 1796 – 15 फ़रवरी 1869) (Ghalib Shayari Rubai) उर्दू के सबसे महान शा’इरों में शुमार किये…
“एक लेखक क़लम तभी उठाता है जब उसकी समझ को आघात पहुँचता है”
Saadat Hasan Manto Biography ~ आज एक मेसेज मेरे पास आया, उस मेसेज में ये बताने की कोशिश की गयी…
एक ज़मीन, दो ग़ज़लें (1): मख़दूम और फ़ैज़..
साहित्य दुनिया की आज हम एक और सीरीज़ शुरू’अ कर रहे हैं, “एक ज़मीन दो ग़ज़लें”. Ghazal Zameen Shayari इस…
दो शा’इर, दो ग़ज़लें सीरीज़ (12): फ़ानी बदायूँनी और राहत इन्दौरी
फ़ानी बदायूँनी की ग़ज़ल: हम मौत भी आए तो मसरूर नहीं होते Hum Maut Bhi Aaye to Masroor Nahin Hote…
दो शा’इर, दो नज़्में (2): मख़दूम और फै़ज़…
Makhdoom Aur Faiz Ki Nazm मख़दूम मुहिउद्दीन की नज़्म: “चारागर” इक चमेली के मंडवे-तले मय-कदे से ज़रा दूर उस मोड़…
दो कहानीकार, दो कहानियाँ (3): ख़लील जिब्रान और सआदत हसन मंटो…
Khalil Jibran Manto Hindi ख़लील जिब्रान की कहानी: तीन चीटियाँ एक व्यक्ति धूप में गहरी नींद में सो रहा था.तीन…
उर्दू शायरी और शब्द : सागर, साग़र और जलील, ज़लील…
Jaleel aur Zaleel सागर(ساگر) और साग़र (ساغر) दो ऐसे लफ़्ज़ हैं जिनके उच्चारण में जो अंतर है वो यूँ तो…