बादल को घिरते देखा – नागार्जुन
अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है। छोटे-छोटे मोती जैसे उसके शीतल तुहिन कणों को मानसरोवर...
अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है। छोटे-छोटे मोती जैसे उसके शीतल तुहिन कणों को मानसरोवर...
झोंपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए थे और अंदर...
क्या कहेगा कभी मिलने भी अगर आएगा वो अब वफ़ादारी की क़स्में तो नहीं खाएगा वो हम समझते थे कि...
अब वो मंजर, ना वो चेहरे ही नज़र आते हैं मुझको मालूम ना था ख्वाब भी मर जाते हैं जाने...
परवीन शाकिर की नज़्म - आईना लड़की सर को झुकाए बैठी कॉफ़ी के प्याले में चमचा हिला रही है लड़का...
उसने कहा था - चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ी वालों की ज़बान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल...
Bhikharin Rabindranath Tagore - अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह...
अपने बिस्तर पे बहुत देर से मैं नीम-दराज़ सोचती थी कि वो इस वक़्त कहाँ पर होगा मैं यहाँ हूँ...
अक्सर मैं सोचा करती हूँ कि कोई व्यक्ति अपने जीवन को लिखने के बारे में क्यों कर उत्सुक होता होगा?...
आ कि वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझसे जिसने इस दिल को परी-ख़ाना बना रक्खा था जिसकी उल्फ़त में...