फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है – अजमल सिराज

फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है जो भी है आप का सब कुछ है हमारा क्या है हम ने कुछ ऐसी बना रक्खी है हालत अपनी पूछता कोई नहीं हाल तुम्हारा क्या है कुछ नहीं देखते कुछ भी हो तिरे दीवाने देखते हैं तिरी जानिब से इशारा क्या है दूर से जो नज़र … Read more

कहाँ हो तुम चले आओ मुहब्बत का तक़ाज़ा है – बहज़ाद लखनवी

कहाँ हो तुम चले आओ मुहब्बत का तक़ाज़ा है ग़म-ए-दुनिया से घबरा कर तुम्हें दिल ने पुकारा है तुम्हारी बे-रुख़ी इक दिन हमारी जान ले लेगी क़सम तुमको ज़रा सोचो कि दस्तूर-ए-वफ़ा किया है न जाने किस लिए दुनिया की नज़रें फिर गईं हम से तुम्हें देखा तुम्हें चाहा क़ुसूर इस के सिवा किया है … Read more

कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ – अहमद फ़राज़

Ranjish Hi Sahi

सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते वर्ना इतने तो मरासिम थे कि आते जाते शिकवा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से तो कहीं बेहतर था अपने हिस्से की कोई शम्अ’ जलाते जाते कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते जश्न-ए-मक़्तल ही न बरपा हुआ वर्ना हम भी पा-ब-जौलाँ ही … Read more

क्या कहेगा कभी मिलने भी अगर आएगा वो

क्या कहेगा कभी मिलने भी अगर आएगा वो अब वफ़ादारी की क़स्में तो नहीं खाएगा वो हम समझते थे कि हम उस को भुला सकते हैं वो समझता था हमें भूल नहीं पाएगा वो कितना सोचा था पर इतना तो नहीं सोचा था याद बन जाएगा वो ख़्वाब नज़र आएगा वो सब के होते हुए … Read more

अब वो मंजर, ना वो चेहरे ही नज़र आते हैं ~ अहमद फ़राज़

अब वो मंजर, ना वो चेहरे ही नज़र आते हैं मुझको मालूम ना था ख्वाब भी मर जाते हैं जाने किस हाल में हम हैं कि हमें देख के सब एक पल के लिये रुकते हैं गुज़र जाते हैं साकिया तूने तो मयख़ाने का ये हाल किया रिन्द अब मोहतसिबे-शहर के गुण गाते हैं जैसे … Read more

जुस्तुजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने – शहरयार

Chaand Shayari Ishq ab meri jaan hai goya - Jaleel Manikpuri

Justju jiski thi usko to na paaya humne जुस्तुजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने सब का अहवाल वही है जो हमारा है आज ये अलग बात कि शिकवा किया तन्हा हमने ख़ुद पशीमान हुए ने उसे शर्मिंदा किया इश्क़ की वज़्अ को क्या ख़ूब निभाया … Read more

अपनी ख़बर, न उसका पता है, ये इश्क़ है

Irfan Sattar

Apnii Khabar na uska pata hai ye ishq hai इरफ़ान सत्तार की ग़ज़ल अपनी ख़बर, न उसका पता है, ये इश्क़ है जो था, नहीं है, और न था, है, ये इश्क़ है पहले जो था, वो सिर्फ़ तुम्हारी तलाश थी लेकिन जो तुमसे मिल के हुआ है, ये इश्क़ है तश्कीक है, न जंग … Read more

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

Ranjish Hi Sahi

Ab Ke Hum Bichhde To Shayad Kabhi Khwaabon mein Milen.. अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नश्शा बढ़ता है शराबें … Read more

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले – ज़ौक़

wo humsafar tha वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी Urdu ke Mushkil Lafz Akhtar Ul Iman Shayari Majaz Shayari Famous Barish Shayari Barsaat Shayari Baarish Shayari Hindi Kahani Arghwan Rabbhi Urdu Lafz Aghori Ka Moh Acaharya Ram Chandra Shukl Ki Kahani Gyaarah Varsh Ka Samay Jigar aur dil ko bachana

Laayi Hayaat Aaye Qaza Le Chali Chale ——- लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले अपनी ख़ुशी न आए न अपनी ख़ुशी चले हो उम्र-ए-ख़िज़्र भी तो हो मालूम वक़्त-ए-मर्ग हम क्या रहे यहाँ अभी आए अभी चले हमसे भी इस बिसात पे कम होंगे बद-क़िमार जो चाल हम चले सो निहायत बुरी चले बेहतर … Read more

ताज़ा मुहब्बतों का नशा जिस्म-ओ-जाँ में है – परवीन शाकिर

Parveen Shakir Best Sher

ताज़ा मुहब्बतों का नशा जिस्म-ओ-जाँ में है फिर मौसम-ए-बहार मिरे गुल्सिताँ में है इक ख़्वाब है कि बार-ए-दिगर देखते हैं हम इक आश्ना सी रौशनी सारे मकाँ में है ताबिश में अपनी महर-ओ-मह-ओ-नज्म से सिवा जुगनू सी ये ज़मीं जो कफ़-ए-आसमाँ में है इक शाख़-ए-यासमीन थी कल तक ख़िज़ाँ-असर और आज सारा बाग़ उसी की … Read more