शायरी

Shayari
‘साहित्य दुनिया’ के ज़रिए कोशिश ये है कि लोगों की रूचि साहित्य और भाषा में बढ़े। ये साहित्य और भाषा से जुड़ी बातों को बड़े-बड़े और गम्भीर वाक्यों से न समझाकर उसे सरल, बोलचाल की भाषा में आम जन तक पहुँचाने का प्रयास है।

दो शाइर, दो नज़्में(9): फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ और अख़्तर-उल-ईमान

Akhtar Ul Iman Shayari Faiz Ahmed Faiz Shayari फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म: बोल बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे,...

दो शाइर, दो नज़्में(7): परवीन शाकिर और फ़हमीदा रियाज़

Parveen Shakir Fehmida Riyaz _________________________________ परवीन शाकिर की नज़्म: नहीं मेरा आँचल मैला है नहीं मेरा आँचल मैला है और...

दो शाइर, दो नज़्में(6): जाँ निसार अख़्तर और जिगर श्योपुरी

Mohabbat Shayari Nazm जाँ निसार अख़्तर की नज़्म: तजज़िया मैं तुझे चाहता नहीं लेकिन, फिर भी जब पास तू नहीं...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (13): परवीन शाकिर और हसरत मोहानी..

परवीन शाकिर की ग़ज़ल: Koo Ba Koo Phail Gayi Baat Shanasayi Ki कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की, उसने ख़ुशबू...

दो शा’इर, दो नज़्में (3): फ़रहत एहसास और फ़हमीदा रियाज़

Farhat Ehsas Nazm फ़रहत एहसास की नज़्म: ख़ुद-आगही वो कैसी तारीक घड़ी थी, जब मुझको एहसास हुआ था मैं तन्हा हूँ...

मजाज़ की ग़ज़ल: “जिगर और दिल को बचाना भी है”

Jigar aur dil ko bachana जिगर और दिल को बचाना भी है, नज़र आप ही से मिलाना भी है मुहब्बत...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें सीरीज़ (12): फ़ानी बदायूँनी और राहत इन्दौरी

फ़ानी बदायूँनी की ग़ज़ल: हम मौत भी आए तो मसरूर नहीं होते Hum Maut Bhi Aaye to Masroor Nahin Hote...

दो शा’इर, दो नज़्में (2): मख़दूम और फै़ज़…

Makhdoom Aur Faiz Ki Nazm मख़दूम मुहिउद्दीन की नज़्म: "चारागर" इक चमेली के मंडवे-तले मय-कदे से ज़रा दूर उस मोड़...