मिर्ज़ा ग़ालिब के बेहतरीन शेर

Ghalib Best Sher

Ghalib Best Sher 1. फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं, फिर वही ज़िंदगी हमारी है 2. बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं ‘ग़ालिब’ कुछ तो है जिसकी पर्दा-दारी है 3. हम भी दुश्मन तो नहीं हैं अपने, ग़ैर को तुझसे मुहब्बत ही सही 4. हम कोई तर्क-ए-वफ़ा करते हैं, न सही इश्क़ मुसीबत ही सही 5. यार से … Read more

मीर के मशहूर शेर

Meer Taqi Meer ki shayari. Ghazal Shayari Maqta संज्ञा के प्रकार ह वाले शब्द Sangya Ke Bhed

Meer Taqi Meer जिन जिन को था ये इश्क़ का आज़ार मर गए अक्सर हमारे साथ के बीमार मर गए _____ दिखाई दिए यूँ कि बे-ख़ुद किया हमें आपसे भी जुदा कर चले _____ इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है यानी अपना ही मुब्तला है इश्क़ Meer Taqi Meer _____ कहते तो हो यूँ कहते यूँ … Read more

मिर्ज़ा ग़ालिब के मशहूर शेर

Mirza Ghalib ki shayari Ghalib Shayari Rubai Naqsh Fariyadi Hai Dard Minnat Kash Yak Zarra e Zamin Nahini Bekaar Baagh Ka Mirza Ghalib ke sher

Mirza Ghalib ke sher कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती _____ जान दी, दी हुई उसी की थी हक़ तो यूँ है कि हक़ अदा न हुआ ______ ज़िंदगी यूँ भी गुज़र ही जाती क्यूँ तिरा राहगुज़र याद आया ______ हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया पर याद आता है वो … Read more

उर्दू के चार सबसे बड़े शाइरों की एक-एक ग़ज़ल…

Urdu ke ustaad shayar ki shayari Acharya Chatur Sen Ki Kahani

Urdu ke ustaad shayar: हम यहाँ चार ग़ज़लें पेश कर रहे हैं. मीर, ग़ालिब, इक़बाल और फ़ैज़ की इन ग़ज़लों के हमने चार-चार शेर ही लिए हैं. हमने सभी ग़ज़लों में रदीफ़ और क़ाफ़िए की पहचान के लिए हमने उन्हें रँग दिया है. लाल रँग से नज़र आ रहा हिस्सा रदीफ़ है और रदीफ़ के … Read more

सोनल सोनकवड़े का उपन्यास “कॉमा” अंत तक बांधे रखने वाली दमदार कहानी..

Sonal Sonkavde Comma Review

Sonal Sonkavde Comma Review ~ अक्सर हमें अपने बड़ों से ये सुनने मिलता है कि आजकल के बच्चों के दिमाग़ में क्या चलता है समझ ही नहीं आता। ये हम अपने आसपास के लोगों के लिए भी कई बार कहते हैं, ख़ासकर तब जब वो किसी रिश्ते में होते हैं या उस रिश्ते से निकले … Read more

ख़ूबसूरत तस्वीरों और जानकारियों से मन मोहती है “लद्दाख़”

Laddakh Review Mahendra Singh

Laddakh Review Mahendra Singh ~ कहते हैं अगर आपको ख़ुद को पहचानना हो तो यात्रा करनी चाहिए। अक्सर हम ख़ुद से मुलाक़ात कर पाते हैं जब हम यात्रा में होते हैं, आने वाली तरह-तरह की परिस्थितियों में हमारा व्यवहार किस तरह का होता है और हम किस तरह से उन परिस्थितियों को समझते हैं और उनके साथ संतुलन बनाते हैं, ये सभी अनुभव यात्रा के दौरान होता है। और एक बात भी जो यात्रा हमें सिखाती है वो ये कि हम अपने परिवार के साथ किस तरह से जुड़े हुए हैं साथ ही परिवार के सदस्यों का व्यवहार कैसा है। आज के समय में ये कटु सत्य है कि घर में साथ रहते हुए हम अपने परिवार से उस तरह से नहीं मिल पाते जैसे हम किसी सफ़र के दौरान मिल पाते हैं।

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जावेद अख़्तर की किताब “तरकश” की समीक्षा

Tarkash Review

Tarkash Review: अक्सर हिंदी में शामिल उर्दू लफ़्ज़ों का सही प्रयोग और उनका उच्चारण सीखना मुश्किल लगता है। लेकिन जहाँ चाह वहाँ राह बस कुछ इसी तर्ज़ पर कुछ ऐसी पुस्तकों को पढ़ने का विचार आया, जिसमे हिंदी के साथ उर्दु लफ्ज़ शामिल हों और वो बहुत ज्यादा कठिन भी न हों…ऐसे में सबसे पहली … Read more

गुलज़ार की किताब “ड्योढ़ी” की समीक्षा

Dyodhi Review

Dyodhi Review

“किताबों से कभी गुज़रो तो यूँ किरदार मिलते हैं
गए वक़्त की ड्योढ़ी में खड़े कुछ यार मिलते हैं”

बस कुछ इसी तरह कई किरदारों से मुलाक़ात हुई गुलज़ार की लिखी “ड्योढ़ी” को पढ़ते हुए. यूँ तो गुलज़ार के शब्दों को कई बार सुना है पर उन्हें पहली बार पढ़ा.
ड्योढ़ी कई छोटी कहानियों का संग्रह है और हर पहली कहानी दूसरी से बिलकुल अलग लगती है। इस एक संग्रह में गुलज़ार आपको कभी सीमा पार ले जाते हैं तो कभी आसमान की सैर करवाते हैं, कभी बचपन की मासूमियत से रुबरु करवाते हैं तो कभी फुटपाथ पर पलती ज़िन्दगी की मुश्किलों का अहसास करवाते हैं,कभी पहाड़ों की सैर करवाते हैं तो कभी आसमान में पतंग के साथ गोते लगवाते हैं। ज़िन्दगी में जिस तरह कई रंगों का समावेश है उसी तरह ये संग्रह भी आपको कभी ख़ुश, कभी भावुक तो कभी ठहाके मारने पर मजबूर करता है।

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‘आपका बंटी’- मन्नू भंडारी (समीक्षा)

Aapka Bunty Review

Aapka Bunty Review ~ “बस चली तो सबके बीच हँसते-बतियाते उसे ऐसा लगा जैसे सारे दिन ख़ूब सारी पढ़ाई करके घर की ओर लौट रहा है; तभी ख़याल आया- “धत्त वो तो स्कूल जा रहा है” इस एक वाक्य में बंटी के मन की मनस्थिति ज़ाहिर हो जाती है। जब आपको घर से ज़्यादा, बाहर आनंद … Read more

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (6): जिगर मुरादाबादी और इरफ़ान सिद्दीक़ी…

Bahadur Shah Zafar Shayari Humko Mita Sake Ye Zamane Mein Dum Nahin Motivational Shayari Mirza Jafar Ali Hasrat Sher Urdu Interesting Facts

दो शा’इर, दो ग़ज़लें सीरीज़ में हम आज आपके सामने जिगर मुरादाबादी और इरफ़ान सिद्दीक़ी की ग़ज़लें पेश कर रहे हैं. Humko Mita Sake Ye Zamane Mein Dum Nahin (Jigar), Mujhe bacha bhi liya chhoR kar chala bhi gaya (Irfan Siddiqui) जिगर मुरादाबादी (Jigar Moradabadi) की ग़ज़ल (Ghazal) : हमको मिटा सके ये ज़माने में … Read more