दोस्ती पर बेहतरीन शेर…
A couple gaze longingly at nature. Dressed in "Old German" clothes, according to Robert Hughes they are "scarcely different in tone or modelling from the deep dramas of nature around them"
Friendship Shayari ~
वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं
~ मिर्ज़ा ग़ालिब
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ज़िद हर इक बात पर नहीं अच्छी
दोस्त की दोस्त मान लेते हैं
दाग़ देहलवी
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दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त
दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से
हफ़ीज़ होशियारपुरी
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दोस्ती को बुरा समझते हैं
क्या समझ है वो क्या समझते हैं
नूह नारवी
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शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ
कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ
वसीम बरेलवी
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मिरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए
तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए
शाज़ तमकनत
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आ कि तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूँ मैं
जैसे हर शय में किसी शय की कमी पाता हूँ मैं
जिगर मुरादाबादी
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वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
जो पिछली रात से याद आ रहा है
नासिर काज़मी
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मुद्दत के ब’अद आज उसे देख कर ‘मुनीर’
इक बार दिल तो धड़का मगर फिर सँभल गया
मुनीर नियाज़ी
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अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो
मुनव्वर राना
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जान-पहचान से भी क्या होगा
फिर भी ऐ दोस्त ग़ौर कर शायद
अहमद फ़राज़
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दोस्त ग़म-ख़्वारी में मेरी सई फ़रमावेंगे क्या
ज़ख़्म के भरते तलक नाख़ुन न बढ़ जावेंगे क्या
मिर्ज़ा ग़ालिब
मुहब्बत
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