ख़्वाब ~ परवीन शाकिर
परवीन शाकिर की नज़्म – ख़्वाब खुले पानियों में घिरी लड़कियाँ नर्म लहरों के छींटे उड़ाती हुई बात-बे-बात हँसती हुई अपने ख़्वाबों के शहज़ादों का तज़्किरा कर रही थीं जो ख़ामोश थीं उनकी आँखों में भी मुस्कुराहट की तहरीर थी उनके होंटों को भी अन-कहे ख़्वाब का ज़ाइक़ा चूमता था! आने वाले नए मौसमों के … Read more