आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ~ मिर्ज़ा ग़ालिब
Aaina Kyun Na Doon Ke Tamasha KaheN jise - Mirza Ghalib आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ऐसा...
Shayari
‘साहित्य दुनिया’ के ज़रिए कोशिश ये है कि लोगों की रूचि साहित्य और भाषा में बढ़े। ये साहित्य और भाषा से जुड़ी बातों को बड़े-बड़े और गम्भीर वाक्यों से न समझाकर उसे सरल, बोलचाल की भाषा में आम जन तक पहुँचाने का प्रयास है।
Aaina Kyun Na Doon Ke Tamasha KaheN jise - Mirza Ghalib आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ऐसा...
Momin ki shayari असर उसको ज़रा नहीं होता रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता बेवफ़ा कहने की शिकायत है तो भी वादा-वफ़ा...
Urdu ke ustaad shayar: हम यहाँ चार ग़ज़लें पेश कर रहे हैं. मीर, ग़ालिब, इक़बाल और फ़ैज़ की इन ग़ज़लों...
1. Umair Najmi Shayari बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है, मगर लगेगा नहीं ...
Aanand Naaraayan Mullaah :: जाने अफ़साना यही कुछ भी हो अफ़साने का नाम, ज़िन्दगी है दिल की धड़कन तेज़ हो...
wo humsafar tha वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी कि धूप छाँव का आलम रहा जुदाई न थी...
Sahir Ki Shayari ख़ुद्दारियों के ख़ून को अर्ज़ां ना कर सके हम अपने जौहरों को नुमायाँ ना कर सके होकर...
Meer Ki Shayari देख तो दिल कि जाँ से उठता है ये धुआँ सा कहाँ से उठता है गोर किस...
Aurat ne janam diya mardon ko mardon ne use bazar diya औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे...
Firaq Gorakhpuri Ki Shayari 1. तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं समझ लो साँस लेना ख़ुद-कुशी करना समझते...