यक-ज़र्रा-ए-ज़मीं नहीं बे-कार बाग़ का ~ मिर्ज़ा ग़ालिब
Yak Zarra e Zamin Nahini Bekaar Baagh Ka ~ Mirza Ghalib यक-ज़र्रा-ए-ज़मीं नहीं बे-कार बाग़ का याँ जादा भी फ़तीला...
Shayari
‘साहित्य दुनिया’ के ज़रिए कोशिश ये है कि लोगों की रूचि साहित्य और भाषा में बढ़े। ये साहित्य और भाषा से जुड़ी बातों को बड़े-बड़े और गम्भीर वाक्यों से न समझाकर उसे सरल, बोलचाल की भाषा में आम जन तक पहुँचाने का प्रयास है।
Yak Zarra e Zamin Nahini Bekaar Baagh Ka ~ Mirza Ghalib यक-ज़र्रा-ए-ज़मीं नहीं बे-कार बाग़ का याँ जादा भी फ़तीला...
Ishq ki shayari बड़ी बेबसी है जो ग़म दे रहे हैं, हमें भूल जाना, क़सम दे रहे हैं जो दिल...
Jigar Moradabadi Best Sher 1- अपना ज़माना आप बनते हैं अहल-ए-दिल हम वो नहीं कि जिनको ज़माना बना गया 2-...
Aaina Kyun Na Doon Ke Tamasha KaheN jise - Mirza Ghalib आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ऐसा...
Momin ki shayari असर उसको ज़रा नहीं होता रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता बेवफ़ा कहने की शिकायत है तो भी वादा-वफ़ा...
Urdu ke ustaad shayar: हम यहाँ चार ग़ज़लें पेश कर रहे हैं. मीर, ग़ालिब, इक़बाल और फ़ैज़ की इन ग़ज़लों...
उमैर नज्मी समकालीन उर्दू शायरी के चर्चित शायरों में शामिल हैं। उनकी शायरी में मोहब्बत, जुदाई, तन्हाई, रिश्तों और ज़िंदगी...
Aanand Naaraayan Mullaah :: जाने अफ़साना यही कुछ भी हो अफ़साने का नाम, ज़िन्दगी है दिल की धड़कन तेज़ हो...
wo humsafar tha वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी कि धूप छाँव का आलम रहा जुदाई न थी...
Sahir Ki Shayari ख़ुद्दारियों के ख़ून को अर्ज़ां ना कर सके हम अपने जौहरों को नुमायाँ ना कर सके होकर...