बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी…. बहादुर शाह ज़फ़र

Bahadur Shah Zafar Shayari Humko Mita Sake Ye Zamane Mein Dum Nahin Motivational Shayari Mirza Jafar Ali Hasrat Sher Urdu Interesting Facts

Bahadur Shah Zafar Shayari बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क़रार बे-क़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी उसकी आँखों ने ख़ुदा जाने किया क्या जादू कि तबीअ’त मिरी माइल कभी … Read more

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया.. सुदर्शन फ़ाकिर

Sudarshan Fakir Shayari Urdu Poetry Meter

Sudarshan Fakir Shayari इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया आप कहते थे कि रोने से न बदलेंगे नसीब उम्र भर आप की इस बात ने रोने न दिया रोने वालों से कहो उनका भी रोना रो लें जिनको मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया तुझसे … Read more

ष wale shabd हिन्दी डिक्शनरी Shayari Wali Dictionary ल वाले शब्द

‘ष’ wale shabd (ष से शुरू होने वाले शब्द) पढ़ने का तरीक़ा: शब्द (वज़्न) सभी अर्थ षंड(21)- साँड षंडाली(222)- तलैया षट्(2)- छह षट्क(21)- छह समुदाय षट्कर्मा(221)- तांत्रिक षट्कोण(221)- छह कोण या भुजाओं वाला षट्भुजीय(2121)- छह कोण या भुजाओं वाला षट्भुज(22)- छह भुजाओं वाला षट्कोणीय(2221)- छह भुजाओं वाला षट्चरण(212)- छह पैरों वाला, टिड्डी षट्पद(22)- कीट, छप्पय … Read more

ग़ज़ल में मक़ता क्या होता है?

Meer Taqi Meer ki shayari. Ghazal Shayari Maqta संज्ञा के प्रकार ह वाले शब्द Sangya Ke Bhed

मक़ता: ग़ज़ल का आख़िरी शे’र मक़ता कहलाता है.अक्सर इसमें शा’इर अपने तख़ल्लुस (pen name) का इस्तेमाल करता है. Ghazal Shayari Maqta तख़ल्लुस: शा’इर जिस नाम से शा’इरी करता है उसे तख़ल्लुस कहते हैं जैसे रघुपति सहाय गोरखपुरी का तख़ल्लुस ‘फ़िराक़’ है जिन्हें हम ‘फ़िराक़’ गोरखपुरी के नाम से जानते हैं. मुहम्मद अल्वी की इस ग़ज़ल … Read more

उर्दू शायरी और शब्द: जावेद या ज़ावेद?

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Javed ya Zaved ?: हमसे बहुत से सवाल ईमेल और सोशल मीडिया के ज़रिए पूछे जाते हैं. कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके बारे में हमने कभी सोचा ही नहीं था. इसी में से एक शब्द की चर्चा हम आज करेंगे. एक बहुत कॉमन नाम जो सुनने को मिलता है वो है “जावेद”, इस नाम से … Read more

अलफ़ाज़ की बातें (15): लखनऊ या लख़नऊ?

Makhdoom Aur Faiz Ki Nazm Urdu Shayari Lafz Lucknow

Urdu Shayari Lafz Lucknow: लखनऊ एक ऐसा शहर है जो पूरी दुनिया में अपनी ज़बान और तहज़ीब के लिए जाना जाता है. लखनऊ शहर को उर्दू के बहुत नज़दीक माना जाता है लेकिन ये भी सच है कि पिछले कुछ सालों में यहाँ एक नया शहर बस गया है. नए बसे लोग भी धीरे-धीरे पुराने शहर की तहज़ीब को अपनाते हैं लेकिन कभी-कभी शुरू में उन्हें कुछ शब्दों को समझने में मुश्किल आती है. हम ऐसे शब्दों की बात यहाँ करेंगे लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि शहर का नाम “लखनऊ” है या “लख़नऊ”.

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शायरी सीखें: ग़ज़ल का मतला क्या होता है?

Ghazal ka Matla

Ghazal ka Matla मत’ला: ग़ज़ल या क़सीदे का वो शे’र जिसके दोनों मिसरों में रदीफ़ और क़ाफ़िये का इस्तेमाल होता है उसे मत’ला कहते हैं. अक्सर को ग़ज़ल का पहला शे’र मत’ला होता है लेकिन एक ग़ज़ल में एक से अधिक मत’ले भी हो सकते हैं, इसको लेकर कोई पाबंदी नहीं है. एक बात और … Read more

शायरी सीखें: क़ाफ़िया क्या है?

Shayari Kya Hai? Qafiya शृ और श्री में अंतर

क़ाफ़िया (Qafiya Kya Hai) ग़ज़ल के हर शेर के दूसरे मिसरे में रदीफ़ से ठीक पहले आने वाले वो शब्द जो एक ही आवाज़ पर ख़त्म होते हैं, उन्हें क़ाफ़िया (Qafiya) कहते हैं.मत’ला में क़ाफ़िया दोनों मिसरों में इस्तेमाल होता है जबकि बाक़ी शे’रों में ये सिर्फ़ मिसरा-ए-सानी में आता है. Qafiya Kya Hai समझने … Read more

रदीफ़ क्या है?

Radeef kya hai Urdu Shayari Behr Mutqarib Mushaira Urdu Shayari संज्ञा के प्रकार

रदीफ़ (Radeef kya hai): ग़ज़ल या क़सीदे के शेरों के अंत में जो शब्द या शब्द-समूह बार-बार दुहराए जाते हैं, उन्हें रदीफ़ कहते हैं. मत’ले में रदीफ़ दोनों मिसरों में रहती है जबकि ग़ज़ल के बाक़ी शे’रों में सिर्फ़ मिसरा-ए-सानी(दूसरे मिसरे) में ही इसका इस्तेमाल होता है. शकील बदायूँनी की इस ग़ज़ल में “पे रोना … Read more

शेर क्या है?

Sher Kaise Likhen

Sher Kaise Likhen शे’र: दो मिसरों की ऐसी कविता जिसके दोनों मिसरे एक बह्र और एक ही ज़मीन पर हों, शे’र कहलाती है. शे’र अगर मत’ला है तो दोनों मिसरों में रदीफ़ और क़ाफ़िए की पाबंदी होगी अन्यथा सिर्फ़ मिसरा-ए-सानी (दूसरे मिसरे) में रदीफ़, क़ाफ़िए की पाबंदी होगी. मिसरा: किसी भी पंक्ति (लाइन) को मिसरा … Read more