मेराज फ़ैज़ाबादी के बेहतरीन शेर…
Meraj Faizabadi Shayari बिखरे बिखरे सहमे सहमे रोज़ ओ शब देखेगा कौन लोग तेरे जुर्म देखेंगे सबब देखेगा कौन ___ आज भी गाँव में कुछ कच्चे मकानों वाले घर में हम-साए के फ़ाक़ा नहीं होने देते __ हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हमने __ हम … Read more