मीर के मशहूर शेर

Meer Taqi Meer ki shayari. Ghazal Shayari Maqta संज्ञा के प्रकार ह वाले शब्द Sangya Ke Bhed

Meer Taqi Meer जिन जिन को था ये इश्क़ का आज़ार मर गए अक्सर हमारे साथ के बीमार मर गए _____ दिखाई दिए यूँ कि बे-ख़ुद किया हमें आपसे भी जुदा कर चले _____ इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है यानी अपना ही मुब्तला है इश्क़ Meer Taqi Meer _____ कहते तो हो यूँ कहते यूँ … Read more

मिर्ज़ा ग़ालिब के मशहूर शेर

Mirza Ghalib ki shayari Ghalib Shayari Rubai Naqsh Fariyadi Hai Dard Minnat Kash Yak Zarra e Zamin Nahini Bekaar Baagh Ka Mirza Ghalib ke sher

Mirza Ghalib ke sher कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती _____ जान दी, दी हुई उसी की थी हक़ तो यूँ है कि हक़ अदा न हुआ ______ ज़िंदगी यूँ भी गुज़र ही जाती क्यूँ तिरा राहगुज़र याद आया ______ हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया पर याद आता है वो … Read more

यक-ज़र्रा-ए-ज़मीं नहीं बे-कार बाग़ का ~ मिर्ज़ा ग़ालिब

Mirza Ghalib ki shayari Ghalib Shayari Rubai Naqsh Fariyadi Hai Dard Minnat Kash Yak Zarra e Zamin Nahini Bekaar Baagh Ka Mirza Ghalib ke sher

Yak Zarra e Zamin Nahini Bekaar Baagh Ka ~ Mirza Ghalib यक-ज़र्रा-ए-ज़मीं नहीं बे-कार बाग़ का याँ जादा भी फ़तीला है लाले के दाग़ का बे-मय किसे है ताक़त-ए-आशोब-ए-आगही खींचा है इज्ज़-ए-हौसला ने ख़त अयाग़ का बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल कहते हैं जिसको इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का ताज़ा नहीं है नश्शा-ए-फ़िक्र-ए-सुख़न मुझे … Read more

आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ~ मिर्ज़ा ग़ालिब

Ghalib Ke Baare Mein Parag Agrawal Ghalib Aur Zauq ki Ghazalen Baazeecha E Atfal Ghalib Aaina Kyun Na Doon Aah Ko Chahiye Ik

Aaina Kyun Na Doon Ke Tamasha KaheN jise – Mirza Ghalib आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ-सा कहें जिसे हसरत ने ला रखा तिरी बज़्म-ए-ख़याल में गुल-दस्ता-ए-निगाह सुवैदा कहें जिसे फूँका है किस ने गोश-ए-मुहब्बत में ऐ ख़ुदा अफ़्सून-ए-इंतिज़ार तमन्ना कहें जिसे सर पर हुजूम-ए-दर्द-ए-ग़रीबी से डालिए … Read more

मोमिन की ग़ज़ल- “तुम मिरे पास होते हो गोया, जब कोई दूसरा नहीं होता”

Momin ki shayari Urdu Shabd Gham Gam हिन्दी व्याकरण वाला वाली द वाले शब्द

Momin ki shayari असर उसको ज़रा नहीं होता रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता बेवफ़ा कहने की शिकायत है तो भी वादा-वफ़ा नहीं होता तुम हमारे किसी तरह न हुए वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता उसने क्या जाने क्या किया ले कर दिल किसी काम का नहीं होता Momin ki shayari इम्तिहाँ कीजिए मिरा जब तक … Read more

उर्दू के चार सबसे बड़े शाइरों की एक-एक ग़ज़ल…

Urdu ke ustaad shayar ki shayari Acharya Chatur Sen Ki Kahani

Urdu ke ustaad shayar: हम यहाँ चार ग़ज़लें पेश कर रहे हैं. मीर, ग़ालिब, इक़बाल और फ़ैज़ की इन ग़ज़लों के हमने चार-चार शेर ही लिए हैं. हमने सभी ग़ज़लों में रदीफ़ और क़ाफ़िए की पहचान के लिए हमने उन्हें रँग दिया है. लाल रँग से नज़र आ रहा हिस्सा रदीफ़ है और रदीफ़ के … Read more

उमैर नज्मी की मशहूर ग़ज़लें..

Umair Najmi Shayari

1. Umair Najmi Shayari बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है, मगर लगेगा नहीं   Umair Najmi Shayari नहीं लगेगा उसे देख कर, मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ, मगर देख कर लगेगा नहीं ! हमारे दिल को अभी मुस्तक़िल पता न बना, हमें पता है तेरा दिल इधर … Read more

ज़िन्दगी है दिल की धड़कन तेज़ हो जाने का नाम..

Aanand Naaraayan Mullaah Urdu Poetry Words Hindi Ki Best Kahaniyan Jayshankar Prasad Ki Kahani Chooriwali

Aanand Naaraayan Mullaah :: जाने अफ़साना यही कुछ भी हो अफ़साने का नाम, ज़िन्दगी है दिल की धड़कन तेज़ हो जाने का नाम क़तरा क़तरा ज़िन्दगी के ज़हर का पीना है ग़म और ख़ुशी है दो घडी पीकर बहक जाने का नाम इंतज़ार ए फ़स्ले गुल में खो चुके आँखों का नूर, और बहार ए … Read more

वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी

wo humsafar tha वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी Urdu ke Mushkil Lafz Akhtar Ul Iman Shayari Majaz Shayari Famous Barish Shayari Barsaat Shayari Baarish Shayari Hindi Kahani Arghwan Rabbhi Urdu Lafz Aghori Ka Moh Acaharya Ram Chandra Shukl Ki Kahani Gyaarah Varsh Ka Samay Jigar aur dil ko bachana

wo humsafar tha वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी कि धूप छाँव का आलम रहा जुदाई न थी न अपना रंज न औरों का दुख न तेरा मलाल शब-ए-फ़िराक़ कभी हमने यूँ गँवाई न थी मुहब्बतों का सफ़र इस तरह भी गुज़रा था शिकस्ता-दिल थे मुसाफ़िर, शिकस्ता-पाई न थी अदावतें थीं, तग़ाफ़ुल था, … Read more

साहिर की ग़ज़ल..

Sahir Ki Shayari Top Urdu Shayari Sahir Ludhianvi Life Story

Sahir Ki Shayari ख़ुद्दारियों के ख़ून को अर्ज़ां ना कर सके हम अपने जौहरों को नुमायाँ ना कर सके होकर ख़राब-ए-मै तेरे ग़म तो भुला दिए लेकिन ग़म-ए-हयात को दरमाँ ना कर सके टूटा तिलिस्म-ए-अहद-ए-मुहब्बत कुछ इस तरह फिर आरज़ू की शम्म’आ फ़रोज़ाँ ना कर सके हर शै क़रीब आके कशिश अपनी खो गयी वो … Read more